मंगलवार 28 मार्च 2017  

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एमपी के बजट में राहत नहीं, बढ़ सकता है करों का बोझ

भोपाल। प्रदेश सरकार बजट में आम आदमी को फिलहाल कोई राहत नहीं देगी। नोटबंदी के कारण रजिस्ट्री सहित अन्य करों से होने वाली आय पर अनिश्चितता को देखते हुए बजट की प्रारंभिक तैयारियों में मौजूदा करों में किसी कटौती का प्रस्ताव नहीं है। यदि अगले दो माह में सरकार की आय नहीं बढ़ी तो फिर नए कर का बोझ भी जनता पर लादा जा सकता है।

खबर के अनुसार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वाणिज्यिक कर के अधिकारियों को टैक्स के नए क्षेत्र तलाशने को कहा है, वहीं वित्त मंत्री जयंत मलैया ने टैक्स में किसी प्रकार की कमी पर विचार नहीं चलने की बात कहकर संकेत दे दिए हैं कि बजट बहुत लोकलुभावन नहीं होगा। उधर, वित्त विभाग ने बजट को लेकर पहले दौर की चर्चा पूरी कर ली है। अब तक इसमें आम आदमी को किसी प्रकार की राहत देने का प्रस्ताव नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक रजिस्ट्री से होने वाली आय में नोटबंदी के चलते 25 प्रतिशत की कमी आई है। अगले दो माह में यदि रियल एस्टेट क्षेत्र में उठाव नहीं आया तो ये कमी और बढ़ सकती है। दस्तावेजों का पंजीयन भी 30 प्रतिशत घटा है। ऑनलाइन कारोबार पर नोटबंदी का असर है।

सरकार को उम्मीद थी कि छह प्रतिशत टैक्स लगाने से लगभग डेढ़-दो सौ करोड़ रुपए की आय बढ़ जाएगी, लेकिन अब इसकी संभावना कम नजर आ रही है। फिलहाल वाणिज्यिक कर में कमी तो नहीं आई, पर वित्त मंत्री से लेकर अपर मुख्य सचिव वित्त तक इसमें कमी की आशंका जता चुके हैं।

वित्त और वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रजिस्ट्री से होने वाली आय नवंबर तक ठीक रही पर दिसंबर से इसमें लगातार कमी आ रही है। यही हालात रहे तो बजट में ऑनलाइन कारोबार, पेट्रोलियम पदार्थ और घरेलू सिलेंडर पर लगने वाले कर में कमी के आसार नहीं हें।

वित्त मंत्री मलैया ने भी स्वीकार किया है कि रजिस्ट्री कम हुई है, लेकिन वाणिज्यिक कर पर फिलहाल फर्क नहीं पड़ा है। आने वाले दो-तीन माह में ये घट सकता है। ऑनलाइन कारोबार और पेट्रोलियम पदार्थों पर लिए जा रहे कर में छूट देने का प्रस्ताव नहीं है।