जानिए क्या होती है आचार संहिता और इसमें क्या कर सकते हैं और क्या नहीं!

भारतीय चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 कब है इसके लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों के ऐलान के साथ ही पूरे देश में लोकसभा चुनाव 2019 आदर्श आचार संहिता लागू हो गई।

लोकसभा चुनाव 2019 लागू होने के साथ ही राजनीतिक पार्टियां, उम्मीदवार, सत्ताधारी पार्टियां और मंत्री-प्रतिनिधियों को चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम करना होगा। अगर राजनितिक दल लोकसभा चुनाव 2019 की आचार संहिता का पालन नहीं करते हैं तो उनपर भारतीय निर्वाचन आयोग कड़ी कार्रवाई करेगा।

क्या होती है आचार संहिता
राज्यों में चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही वहां चुनाव आचार संहिता भी लागू हो जाती है। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही प्रदेश सरकार और प्रशासन पर कई अंकुश लग जाते हैं। सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं।
राजनैतिक दलों अभ्यर्थियों के लिए आदर्श आचर संहिता के नियम

किसी दल या अभ्यर्थी को एसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये, जो विभिन्न जातियों और धार्मिक और भाषायी समुदायों के बीच विद्यमान मतभेदों को बढ़ाये या घृणा की भावना उत्पन्न करे या तनाव पैदा करे।

जब अन्य राजनैतिक दलों की आलोचना की जाये, तब वह उनकी नीतियों और कार्यक्रम, पूर्ववत छवि ओर कार्य तक ही सीमित होनी चाहिये। यह भी आवश्यक है कि व्यक्तिगत जीवन के ऐसे सभी पहलुओं की आलोचना नहीं की जानी चाहिये

जिनका संबंध अन्य दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं के सार्वजनिक क्रियाकलापों से न हो। दलों या उनके कार्यकर्ताओं के बारे में कोई ऐसी आलोचना नहीं की जानी चाहिये, जिनकी सत्यता स्थापित न हुई हो या तोड़-मरोड़कर कही गई बातों पर आधारित हों।

मत प्राप्त करने के लिये जातीय या साम्प्रदायिक भावनाओं की दुहाई नहीं दी जानी चाहिये। मजिस्दों, गिरिजाघरों, मंदिरों या पूजा के अन्य स्थानों का निर्वाचन प्रचार के लिये मंच के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिये।

सभी दलों और अभ्यर्थियों को ऐसे सभी कार्यो से ईमानदारी के साथ बचना चाहिये, जो निर्वाचन विधि के अधीन ‘भ्रष्ट आचरण’ और अपराध हैं जैसे कि मतदाताओं को रिश्वत देना, मतदाताओ को अभित्रस्त करना

मतदाताओं का प्रतिरूपण पोलिंग स्टेशन के 100 मीटर के भीतर मत देने का अनुरोध संयाचना करना, मतदान की समाप्ति के लिये नियत समय को समाप्त होने वाली 48 घंटे की काालावधि के दौरान सार्वजनिक सभाऐं करना और मतदाताओं को सवारी से पालिंग स्टेशनों तक ले जाना और वहां से वापस लाना।

सभी राजनैतिक दलों या अभ्यार्थियों को इस बात का प्रयास करना चाहिये कि वे प्रत्येक व्यक्ति के शांतिपूर्ण ओ विघ्नरहित घरेलू जिन्दगी के अधिकार का आदर करें, चाहे वे उसके राजनैतिक विचारों या कार्यों के कितने ही विरूद्ध क्यों न हों।

व्यक्तियों के विचारों या कार्यों या कार्यों का विरोध करने के लिये उनके घरों के सामने प्रदर्शन आयोजित करने या धरना देने के तरीकों का सहारा किसी भी परिस्थिति में नहीं लेना चाहिये।

किसी भी राजनैतिक दल या अभ्यर्थी को घ्वजदण्ड बनाने, ध्वज टांगने, सूचनायें चिपकाने, नारे लिखने आदि के लिये किसी व्यक्ति की भूमि, भवन, अहाते, दीवार आदि की उनकी अनुमति के बिना उपयोग करने की अनुमति अपने अनुयायियों को नहीं देनी चाहिए।

राजनैतिक दलों और अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि उनके समर्थक अन्य दलों द्वारा आयोंजित सभाओं जुलूसों आदि में बाधाएं न डालें या उन्हे भंग न करे। एक राजनेतिक दल के कार्यकर्ताओं या शुभचिन्तकों को दूसरे राजनैतिक दल द्वारा आयोजित सार्वजनिक सभाओं में मौखिक रूप से या लिखित रूप में प्रश्न पूछ कर या अपने दल के परचे वितरित करके, गड़बड़ी पैदा नहीं करनी चाहिये।

किसी दल द्वारा जुलूस उन स्थानों से होकर नहीं ले जाने चाहिये, जिन स्थानों पर दूसरे दल द्वारा सभांए की जा रही हों। एक दल द्वारा निकाले गये पोस्टर दूसरे दल के कार्यकर्ताओं द्वारा हटाये नहीं जाने चाहिये।