बसंत पंचमी को भूलकर भी ना करें ये काम, रूठ जाती हैं मां सरस्वती!

बंसत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा का विधान है. इस दिन पूरे विधि-विधान से मां की पूजा करने से मनचाहा फल मिलता है. इस साल ये त्योहार 10 फरवरी को मनाया जाएगा.

ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती पृथ्वी पर प्रकट हुईं थीं. उन्हीं के जन्म के उत्सव पर बसंत पचंमी का त्योहार मनाया जाता है, सरस्वती देवी की पूजा की जाती है.

क्या ना करें
ये तो हम सभी जानते हैं कि बसंत पंचमी के दिन पीले या हरे रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं. इसलिए इस दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए. इस दिन पीले, सफेद या धानी रंग के वस्त्र पहन सकते हैं.

सरस्वती पूजा के इस दिन शांत रहना चाहिए. किसी से वाद-विवाद में ना फंसें. गुस्सा ना करें. इस दिन पितृ तर्पण भी करने का विधान है. इसलिए ये ध्यान रखें कि घर में भी कलह ना हो. ऐसा होने से पितरों को कष्ट पहुंचता है.

इस दिन पेड़-पौधे काटने से बचना चाहिए. घर में भी पौधों की कटाई-छंटाई ना करें.
इस दिन सुबह स्नान करने के बाद पहले मां सरस्वती की पूजा करें. फिर ही कुछ खाएं. बिना नहाए ना रहें.

इस दिन तामसिक चीजों के सेवन से बचना चाहिए. मांसाहार और शराब का सेवन ना करें. सात्विक भोजन ग्रहण करें और खुश रहें.

बंसत पंचमी शुभ मुहर्त
इस साल बसंत पंचमी 9 फरवरी को दोपहर 12.25 बजे से शुरू होगी. अगले दिन 10 फरवरी को दोपहर 2.08 बजे तक रहेगी. पूजा का शुभ मुहूर्त 10 फरवरी को सुबह 07.07 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक का है.

क्या करें विद्यार्थी
इस दिन विद्यार्थी, लेखक और कलाकार देवी सरस्वती की उपासना करते हैं. विद्यार्थी अपनी किताबें, लेखक अपनी कलम और कलाकार अपने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट और बाकी चीजें मां सरस्वती के सामने रखकर पूजा करते हैं.