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शिव मंदिर में चोरी करने पहुंचे थे कुबेर, बदले में मिला था ये अनोखा वरदान


कुबेर को शास्त्रों में धन का देवता के तौर पर माना गया है। कुबेर को कहीं-कहीं धन का रखवाला भी कहा गया है। साथ ही इन्हें यक्षपति अर्थात् यक्षों के राजा के रूप में भी जाना जाता है।

कौन थे कुबेर
पुराणों के अनुसार कुबेर असुर राज रावण के भाई भी थे। कुबेर के बारे में बहुत सारी कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन शायद बहुत कम लोग ही होंगे जिन्हें इस बात की जानकारी होगी कि पूर्व जन्म में कुबेर एक चोर थे। चोर भी कोई सामान्य या ऐसा-वैसा नहीं थे। कुबेर भगवान के घर से भी चोरी करने में चूकते नहीं थे। वे गरीब से लेकर अमीर के घर, मंदिर हर जगह चोरी किया करते थे।

ये है चोरी की कहानी
एक बार कुबेर चोरी करने के मकसद से भगवान शिव के मंदिर में गए। भवगान शिव का वह मंदिर बहुमूल्य हीरे-जवाहरात, सोने-चांदी के भरा जगमगा रहा था। कुबेर ने जैसे ही कीमती रत्नों को समेटना चाहा, मंदिर में रखा दीया बुझ गया।

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दीए के बुझने से मंदिर में अमावस्या जिस अंधेरा छा गया। कुबेर को अंधरे में अब कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। कुबेर ने उस दिए को जलने की अथाह कोशिश की, लेकिन असफल रहे।  फिर उसने अपने शरीर के कपड़े उतार कर उसमें आग लगा दी। इस तरह कुबेर में शिव मंदिर में छाए घने अंधेरे को प्रकाशमय कर दिया।

ऐसे मिला था वरदान
भगवान शिव यह देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए। कुबेर से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अगले जन्म में धन के देवता कुबेर के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि भगवान शिव कितनी जल्दी और सहजता के साथ अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं।

इसलिए कहा जाता है कि भगवान शिव के भक्तों को उनके समक्ष दीया अवश्य जलाना चाहिए। कुबेर को धन का रखवाला माना जाता है, वह धन के देवता नहीं है। इसलिए इनकी मूर्ति हमेशा मंदिर के बाहर रहती है ना कि अंदर। ये भगवान शिव के अनन्य भक्तों में से एक हैं।

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