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शरद यादव और अली अनवर को झटका, राज्यसभा की सदस्यता रद्द


पटना। पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल होने के कारण शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई। राज्यसभा सचिवालय ने सोमवार देर रात इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इसी के साथ जदयू से बागी तेवर अपनाने के बाद इन दोनों नेताओं को यह तीसरा बड़ा झटका लगा है।

इसके पहले असली जदयू होने के दावे को खरिज कर चुनाव आयोग ने दो बार झटका दिया था। राज्यसभा में जदयू के नेता रामचन्द्र प्रसाद सिंह ने सभापति से इन दोनों सदस्यों की सदस्यता खत्म करने का आवेदन दिया था।

उन्होंने तर्क दिया था कि पटना में राजद की रैली में शामिल होकर शरद यादव और अली अनवर ने खुद ही जदयू से नाता तोड़ लिया है। ये दोनों नेता लगतार पार्टी विरोधी गतिविधि कर रहे हैं। इसी मांग के आधार पर सभापति ने दोनों नेताओं की सदस्यता खत्म कर दी।

फैसले की जानकारी दोनों नेताओं को गुजरात में मिली। अली अनवर ने फोन पर इस फैसले की पुष्टि की। साथ ही कहा कि शरद यादव के साथ उन्हें भी फैसले की कॉपी मिल गई है।

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अब जल्द ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। शरद गुट के नेता और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि रात दस बजे इस आशय की चिट्ठी नेताओं को दी गई है। यह ठीक नहीं है।

महागठबंधन से नाता तोड़ने के विरोध में हुए थे बागी मालूम हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राजद से नाता तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद से ही राज्यसभा सदस्य शरद यादव और अली अनवर ने बागी तेवर अपना लिया था। शरद यादव ने राज्य में महागठबंधन जारी रहने का ऐलान कर दिया। साथ ही राज्यभर के दौरे पर निकल गए।

उन्होंने बिहारभर में जनता को यह बताने का प्रयास किया कि असली जदूय वही हैं और उनका राजद के साथ गठबंधन अभी जारी है। चुनाव आयोग में भी शरद यादव ने असली जदयू होने का दावा किया था।

साथ ही जदूय के चुनाव चिह्न तीर निशान पर भी दावा ठोका था। लेकिन आयोग ने उनकी दलील स्वीकार नहीं की और तीर निशान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खाते में दे दिया। इसके बाद दोबारा जदयू पर दावे के साथ शरद खेमा चुनाव आयोग गया, लेकिन उन्हें एक बार फिर हार मिली।

आरसीपी सिंह ने सभापति के फैसले का किया स्वागत
राज्यसभा में जदयू के नेता आरसीपी सिंह ने कहा कि राज्यसभा के रूल नंबर दस के तहत शरद यादव की सदस्यता समाप्त हुई है। हमने राज्यसभा के सभापति को दिए आवेदन में कहा था कि शरद यादव जदयू की सदस्यता का त्याग कर दूसरे दल से जुड़ गए हैं।

सिंह ने कहा कि कांग्रेस चाहती थी कि शरद यादव का मामला विशेषाधिकार समिति और आचार संबंधी कमेटी के पास जाए, लेकिन हमने तथ्यों के साथ सभापति को कन्विंस किया कि यह स्वेच्छा से दल त्याग का मामला बनता है। जदयू सभापति के फैसले का स्वागत करता है। इससे लोकतंत्र की जीत हुई है।

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