देश का एकमात्र मंदिर, जहां शहीदों के नाम पर 10 साल से जल रही जोत

रायपुर। राजधानी में देश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां दिल्ली के इंडिया गेट की तर्ज पर अमर जवानों की याद में स्तंभ का निर्माण किया गया है। स्तंभ के ऊपर अमर जवान अखंड जोत पिछले 10 साल से प्रज्ज्वलित हो रही है। विधिवत प्रतिदिन सुबह झंडा फहराया और उतारा जाता है।

साथ ही देश की सुरक्षा में तैनात वायु सेना, थल सेना, जल सेना समेत सभी मुख्य सुरक्षा बलों का झंडा भी लहरा रहा है। मंदिर दर्शन करने आने वाले युवा अमर जवानों की स्मृति में बनाए गए स्तंभ व प्रज्ज्वलित जोत के समक्ष नतमस्तक होकर शहीदों को श्रद्धाजंलि अर्पित करते हैं।

राजधानी से पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित रावांभाठा गांव के बंजारी मंदिर के मुख्य द्वार पर 2007 में अमर जवान स्तंभ की स्थापना की गई। आंधी आए, चाहे तूफान, यहां बारहों महीने प्रज्ज्वलित हो रही अखंड जोत के प्रति युवाओं के दिलों में अपार श्रद्धा है। मंदिर के मुख्य ट्रस्टी हरीश भाई जोशी बताते हैं कि अमर जवान स्तंभ बनाने का उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाना है।

यदि इस मंदिर से प्रेरणा लेकर अन्य मंदिरों, मस्जिदों, चर्च, गुरुद्वारा के समक्ष भी अमर शहीद जवानों के नाम पर स्तंभ बनता है तो यह जवानों के लिए सच्ची श्रद्धाजंलि होगी।

आज के बच्चों को मालूम ही नहीं है कि देश की आजादी को दिलाने के लिए हजारों शहीदों ने कुर्बानी दी है। सरकार को चाहिए किसभी धर्म स्थलों के बाहर अमर जवान जोत की स्थापना करना अनिवार्य घोषित कर दे। इससे धर्म स्थलों में आने के प्रति युवा जागरूक भी होंगे और देशभक्ति की भावना भी जागेगी।

दानदाताओं का नाम नहीं लिखा जाता
भव्य बंजारी मंदिर परिसर में महादेव, राधा-कृष्ण, हनुमान, भैरव बाबा आदि देवों की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित हैं। साथ ही गौशाला और स्कूल का संचालन भी किया जा रहा है। यहां लोग गुप्त दान ही देते हैं। दान देने वालों का नाम किसी भी पत्थर या चीजों पर अंकित नहीं किया जाता।

फिल्म अभिनेता गोविंदा आए तब किया था दर्शन
पिछले साल फिल्म अभिनेता गोविंदा रायपुर आए थे, तब उन्हें बंजारी मंदिर ले जाया गया था। माता का दर्शन कर वे अभिभूत हो गए थे। उन्होंने कहा था यदि कभी दोबारा आएंगे तो मां का दर्शन अवश्य करेंगे।

गांधीजी के छुआछूत भगाओ अभियान से प्रेरणा लेकर हरिजन ने बनाया मंदिर
1930 के आसपास जब छुआछूत का बोलबाला और हरिजनों को किसी भी मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। उस वक्त महात्मा गांधी हरिजनों को अधिकार दिलाने अभियान चला रहे थे। उसी दौरान गांधीजी से प्रेरणा लेकर रावांभाठा के सुदामा सतनामी ने बंजारी माता की प्रतिमा को स्थापित करने गर्भगृह बनवाया। उस समय आसपास के गांवों के पिछड़े लोग यहां दर्शन करने आते थे।

13 जोत से शुरू हुआ सिलसिला अब साढ़े आठ हजार तक पहुंचा
1987 में मंदिर के नवनिर्माण के बाद क्वांर नवरात्रि में 13 लोगों ने जोत प्रज्ज्वलित कराई। धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति रायपुर से लेकर बिलासपुर तक फैलती गई। वर्तमान में यह रायपुर का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है जहां 8500 से अधिक जोत प्रज्ज्वलित की जा रही है।

मंदिर के सुरंग में इच्छाधारी नाग का वास
कहा जाता है कि माता की प्रतिमा के पीछे ही एक सुरंग नुमा खोह है, जहां नाग देवता का वास है। स्थानीय लोगों में मान्यता है कि वह इच्छाधारी नाग है और कभीकभार दिखाई देता है।

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