मकर संक्रांति मनाने का केवल धार्मिक नहीं, वैज्ञानिक महत्व भी है

दुनियाभर में कई धर्मों में मनाये जाने वाले त्योहारों को वैज्ञानिक महत्व के तौर पर ख़ारिज कर दिया जाता है, वहीं हिंदू त्योहार अपने धार्मिक महत्व के साथ वैज्ञानिक महत्व भी रखते हैं। जिसे हम इन पंक्तियों द्वारा समझ सकते हैं।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व:
> मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं।
> द्वापर युग में महाभारत युद्ध के समय भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था।
> उत्तरायण का महत्व बताते हुए गीता में कहा गया है कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय रहती है।
> इसी दिन भागीरथ के तप के कारण गंगा मां नदी के रूप में पृथ्वी पर आईं थीं। और राजा सगर सहित भागीरथ के पूर्वजों को तृप्त किया था।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व:
> मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है। इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं। इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का महत्व बहुत है।
> मकर संक्रांति में उत्तर भारत में ठंड का समय रहता है। ऐसे में तिल-गुड़ का सेवन करने के बारे में विज्ञान भी कहता है। ऐसा करने पर शरीर को ऊर्जा मिलती है। जो सर्दी में शरीर की सुरक्षा के लिए मदद करता है।
> इस दिन खिचड़ी का सेवन करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। खिचड़ी पाचन को दुरुस्त रखती है। इसमें अदरक और मटर मिलाकर बनाने पर यह शरीर को रोग-प्रतिरोधक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है।

loading...