जब मुग़ल सम्राट ने गुरु गोबिंदजी को कहा ‘भारत का संत’

तखत श्री पटना साहिब या श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब पटना शहर में स्थित है। सिख धर्म की आस्था से जुड़ा यह एक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है। यहां सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह का जन्म हुआ था। गुरु गोविंद सिंह जी की जयंती 5 जनवरी को है।

सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह की माता का नाम गुजरी और पिता का नाम गुरु तेगबहादुर था। उनके पिता सिखों के नवें गुरू थे। गुरु गोविंद सिंह जी जब 9 वर्ष के थे जब 10वें सिख गुरु बने।

उन्होंने अपने पिता के विचारों पर चलते हुए मुग़ल शासक औरंगजेब से कश्मीरी हिन्दुओं की सुरक्षा की। वे बहुभाषी थे। उन्हें संस्कृत, उर्दू, हिंदी, ब्रज, गुरुमुखी और फारसी भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने योद्धा बनने के लिए मार्शल आर्ट भी सीखा और सिखों के नाम के आगे ‘सिंह’ लगाने की परंपरा की शुरुआत की।

गुरु गोविंद सिंह ही थे जिन्होंने युद्ध में पंच ककारों को सिखों के लिए अनिवार्य बनाया, जोकि क्रमशः केश, कंघा, कच्छा, कड़ा और कृपाण (चाकू जैसी वस्तु) हैं। सन् 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने एक खालसा वाणी स्थापित की वह है ‘वाहेगुरुजी का खालसा, वाहेगुरुजी की फ़तेह’।

यह बहुत दिलचस्प है कि औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगलों ने गुरु गोविंद सिंह को लंबे समय तक याद नहीं रखा। बाद के मुगलों के सम्राट बहादुर शाह गुरु गोविंद सिंह के मित्र बने और उन्होंने उन्हें ‘भारत का संत नाम’ उपाधि से नवाजा।