ऐसे जाने, क्या आपकी कुंडली में है ‘राजयोग’

हर व्यक्ति सफलता चाहता है, और सफलता सिर्फ और सिर्फ मेहनत से ही हासिल की जा सकती है। लेकिन मेहनत के साथ भाग्य का होना भी जरूरी है। यह भाग्य या कहें योग जन्मकुंडली में हर व्यक्ति के लग्न में छिपा होता है।

लग्न में प्रभावशाली योग राजयोग माना गया है। हर व्यक्ति की जन्मकुंडली में 9वां और 10वां स्थान कर्म का होता है। कोई भी व्यक्ति इन दोनों घरों की वजह से ज्यादा सुख पाता है।

कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है। यदि जन्म कुंडली में 9वें और10वें भाग में सही ग्रह मौजूद है तो यह परिस्थितियां राजयोग बनाती हैं। भारतीय ज्योतिष के अनुसार ऐसे जातक जिनको राजयोग होता है वे भविष्य में राजनेता, मंत्री आदि प्रोफेशन में अपने नाम की अमिट छाप छोड़ते हैं।

मेष लग्न: यदि मंगल और ब्रहस्पति कुंडली के 9वें और10वें भाग विराजमान होते हैं तो यह राजयोग कारक बन जाता है।

वृष लग्न: जब शुक्र और शनि 9वें और10वें भाग पर विराजमान होते हैं तो यह राजयोग का निर्माण कर देते हैं। इस लग्न में शनि राजयोग के लिए अहम कारक बताया जाता है।

मिथुन लग्न: अगर बुध या शनि कुंडली के नौवें या दसवें घर में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले जातक का जीवन राजाओं जैसा बन जाता है।

कर्क लग्न: अगर चंद्रमा और ब्रहस्पति भाग्य या कर्म के स्थान पर मौजूद होते हैं तो यह केंद्र त्रिकोण राज योग बना देते हैं।

सिंह लग्न: जातकों की कुंडली में अगर सूर्य और मंगल दशम या भाग्य स्थान में बैठ जाते हैं तो जातक के जीवन में राज योग कारक का निर्माण हो जाता है।

कन्या लग्न: कन्या लग्न में बुध और शुक्र अगर भाग्य स्थान या दसम भाव में एक साथ आ जाते हैं तो जीवन बहुत अमीर जैसे लोगों की तरह होता है।

तुला लग्न: यदि शुक्र या बुध अगर कुंडली के नौवें या दसवें स्थान पर एक साथ विराजमान हो जाता है तो इस ग्रहों का शुभ असर जातक को राजयोग के रूप में प्राप्त होने लगता है।

वृश्चिक लग्न: यदि सूर्य और मंगल, भाग्य स्थान या कर्म स्थान (नौवें या दसवें) भाव में एक साथ आ जाते हैं तो ऐसी कुंडली वाले का जीवन बहुत ज्यादा सुखी लोगों की तरह होता है।

धनु लग्न: ऐसे जातकों की कुंडली में राजयोग के कारक, ब्रहस्पति और सूर्य माने जाते हैं। तब यह राजयोग कारक बन जाता है।

मकर लग्न: मकर लग्न वाली की कुंडली में अगर शनि और बुध की युति, भाग्य या कर्म स्थान पर मौजूद होती है तो राजयोग बन जाता है।

कुंभ लग्न: कुंभ लग्न वालों का अगर शुक्र और शनि नौवें या दसवें स्थान पर एक साथ आ जाते हैं तो जीवन राजाओं जैसा हो जाता है।

मीन लग्न: मीन लग्न वालों का अगर ब्रहस्पति और मंगल जन्म कुंडली के नवें या दसमं स्थान पर एक साथ विराजमान हो जाते हैं तो यह राज योग बना देते हैं।